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बदलते जयपुर में पुराने बाजारों की पहचान पर मंडराता खतरा

परकोटे के पारंपरिक बाजार आधुनिक खुदरा कारोबार और बदलती खरीदारी की आदतों के बीच अपनी पहचान बचाए रखने की जद्दोजहद कर रहे हैं। एक विस्तृत पड़ताल।

राजस्थान डेस्क· 26 अगस्त 2026, 12:53 अपराह्न· अपडेट: 11 सितंबर 2026, 12:15 अपराह्न
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bazaar — प्रतीकात्मक तस्वीर
Wikimedia Commons

जयपुर। सुबह के दस बजे परकोटे की एक संकरी गली में दुकानें खुलनी शुरू हो चुकी हैं। पीढ़ियों से यहां कपड़े का कारोबार कर रहे एक दुकानदार अपनी दुकान के बाहर बैठकर पुराने दिनों को याद करते हैं, जब सुबह से ही ग्राहकों की कतार लग जाती थी।

आज तस्वीर कुछ अलग है। शहर के बाहरी इलाकों में बने बड़े शॉपिंग मॉल और ऑनलाइन शॉपिंग के बढ़ते चलन ने परकोटे के परंपरागत बाजारों के सामने नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं।

बदलती खरीदारी की आदतें

शहर के युवा वर्ग का बड़ा हिस्सा अब कपड़े, इलेक्ट्रॉनिक्स और रोजमर्रा का सामान ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से खरीदना पसंद करता है। एक स्थानीय व्यापार संगठन के सर्वे के अनुसार बीते पांच वर्षों में परकोटे के कई पुराने बाजारों में पैदल आने वाले ग्राहकों की संख्या में कमी दर्ज की गई है।

  • पार्किंग की कमी के कारण ग्राहक बाजार आने से कतराते हैं

  • युवा ग्राहकों का रुझान ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की ओर बढ़ा

  • मॉल संस्कृति ने खरीदारी के अनुभव को बदल दिया

फिर भी टिके हुए हैं पारंपरिक बाजार

इसके बावजूद कई पारंपरिक बाजार अपनी खासियत के दम पर टिके हुए हैं। जयपुरी रजाई, ब्लॉक प्रिंट, कुंदन-मीनाकारी के आभूषण जैसे उत्पादों के लिए ग्राहक आज भी परकोटे का ही रुख करते हैं।

जो चीज़ें यहां हाथ से बनती हैं, वो मशीन या ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर नहीं मिलतीं — यही हमारी असली ताकत है।

व्यापार मंडल के प्रतिनिधियों का मानना है कि अगर बाजारों में बुनियादी सुविधाएं—साफ-सफाई, पार्किंग, सुरक्षा—बेहतर की जाएं, तो पारंपरिक बाजार फिर से रौनक हासिल कर सकते हैं। इसके साथ ही कई युवा दुकानदार अब अपने पुश्तैनी कारोबार को सोशल मीडिया और ऑनलाइन माध्यम से भी जोड़ रहे हैं, ताकि पुरानी विरासत नए ग्राहकों तक पहुंच सके।

शहर के शहरी विकास विशेषज्ञों का कहना है कि परकोटे के बाजारों का भविष्य इस बात पर निर्भर करेगा कि प्रशासन, व्यापारी और नई पीढ़ी मिलकर इस विरासत को कैसे आधुनिक जरूरतों के साथ जोड़ पाते हैं।

राजस्थान डेस्क

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पाठकों की प्रतिक्रिया

अंजलि सिंह

इस समस्या पर प्रशासन को जल्द ध्यान देना चाहिए।

29 अगस्त 2026, 10:00 पूर्वाह्न

विकास अग्रवाल

हमारे इलाके में भी पिछले कई दिनों से यही स्थिति है।

3 सितंबर 2026, 6:46 अपराह्न

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