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ज़मीनी रिपोर्ट

किसानों की जुबानी: बदलते मौसम के बीच खेती की बदलती चुनौतियां

राजस्थान के ग्रामीण इलाकों में किसानों से बातचीत के आधार पर बदलते मौसम के मिजाज और खेती पर उसके असर को समझने की कोशिश।

राजस्थान डेस्क· 1 मई 2026, 9:02 पूर्वाह्न· अपडेट: 11 सितंबर 2026, 12:15 अपराह्न
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farmers — प्रतीकात्मक तस्वीर
Wikimedia Commons

जयपुर से करीब साठ किलोमीटर दूर एक गांव में सुबह-सुबह खेतों की ओर जाते किसानों से बातचीत में मौसम का जिक्र सबसे पहले आता है। पिछले कुछ वर्षों में बारिश के पैटर्न में आए बदलाव ने खेती की योजना बनाना मुश्किल कर दिया है।

अनिश्चित बारिश, बढ़ी चिंता

एक किसान ने बताया कि पहले मानसून का एक तय समय होता था, जिसके हिसाब से बुवाई की जाती थी। अब कई बार बारिश देरी से आती है या फिर बहुत कम समय में इतनी तेज होती है कि खेतों में पानी भर जाता है।

अब न बारिश का भरोसा है, न मौसम का — हर साल कुछ नया जोखिम लेकर आता है।

समाधान की तलाश

कुछ किसानों ने बताया कि वे अब पारंपरिक फसलों के साथ कम पानी में होने वाली फसलों को भी आजमा रहे हैं। कृषि विभाग के स्थानीय अधिकारी किसानों को नई तकनीकों और मौसम पूर्वानुमान आधारित सलाह देने का प्रयास कर रहे हैं, हालांकि गांव-गांव तक यह जानकारी पहुंचाना अब भी एक चुनौती है।

स्थानीय किसान संगठनों का कहना है कि सरकार को फसल बीमा प्रक्रिया को और सरल बनाना चाहिए, ताकि प्रतिकूल मौसम की स्थिति में किसानों को समय पर राहत मिल सके।

राजस्थान डेस्क

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पाठकों की प्रतिक्रिया

अंजलि सिंह

जयपुर में यातायात की समस्या लगातार बढ़ रही है।

21 जून 2026, 11:30 पूर्वाह्न

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