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नागरिक जागरूकता के बिना अधूरी है शहरी सफाई

स्वच्छता अभियानों की सफलता सिर्फ प्रशासनिक प्रयासों पर नहीं, बल्कि नागरिकों की भागीदारी पर भी निर्भर करती है।

लेख पत्र संवाददाता· 23 जून 2026, 2:57 पूर्वाह्न· अपडेट: 11 सितंबर 2026, 12:15 अपराह्न
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drainage garbage — प्रतीकात्मक तस्वीर
Wikimedia Commons

हर साल नगर निगम सफाई अभियानों पर करोड़ों रुपये खर्च करता है, नए कचरा वाहन खरीदे जाते हैं, सफाई कर्मचारियों की संख्या बढ़ाई जाती है — फिर भी शहर की गलियों और नालों में कचरे की समस्या पूरी तरह हल नहीं होती।

इसकी एक बड़ी वजह यह है कि सफाई को अक्सर पूरी तरह प्रशासन की जिम्मेदारी मान लिया जाता है, जबकि हकीकत में यह एक साझा जिम्मेदारी है। जब तक नागरिक कचरे को सही तरीके से अलग करना, सार्वजनिक स्थानों पर कचरा न फेंकना और नालों में कचरा न बहाना नहीं सीखते, तब तक अकेले प्रशासनिक प्रयास सीमित असर ही दिखा पाएंगे।

स्कूलों में स्वच्छता शिक्षा को गंभीरता से शामिल करना, मोहल्ला स्तर पर जागरूकता अभियान चलाना, और नियमों के उल्लंघन पर सख्ती के साथ-साथ सकारात्मक प्रोत्साहन देना — ये सब मिलकर ही असली बदलाव ला सकते हैं।

एक साफ-सुथरा शहर सिर्फ नगर निगम के बजट से नहीं, बल्कि हर नागरिक की छोटी-छोटी आदतों से बनता है। यह जिम्मेदारी जितनी प्रशासन की है, उतनी ही हम सबकी भी है।

लेख पत्र संवाददाता

स्टाफ रिपोर्टर — लेख पत्र

लेख पत्र की संपादकीय टीम की ओर से विचार और संपादकीय लेखन।

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पाठकों की प्रतिक्रिया

राहुल वर्मा

धन्यवाद लेख पत्र, स्थानीय मुद्दों को उठाने के लिए।

26 जुलाई 2026, 8:10 पूर्वाह्न

अंजलि सिंह

धन्यवाद लेख पत्र, स्थानीय मुद्दों को उठाने के लिए।

7 अगस्त 2026, 7:25 पूर्वाह्न

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