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ज़मीनी रिपोर्ट

सांगानेर के कुम्हार बस्ती में परंपरागत शिल्प के सामने नई चुनौतियां

सांगानेर की कुम्हार बस्ती में मिट्टी के बर्तन बनाने वाले कारीगरों से बातचीत — बदलते समय में उनके सामने आ रही चुनौतियों पर एक रिपोर्ट।

राजस्थान डेस्क· 16 मार्च 2026, 12:33 अपराह्न· अपडेट: 11 सितंबर 2026, 12:15 अपराह्न
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textile business — प्रतीकात्मक तस्वीर
Wikimedia Commons

जयपुर। सांगानेर की एक बस्ती में पीढ़ियों से मिट्टी के बर्तन और सजावटी सामान बनाने वाले कारीगर आज अपने पारंपरिक हुनर को बचाए रखने की जद्दोजहद कर रहे हैं।

एक बुजुर्ग कारीगर ने बताया कि प्लास्टिक और मशीन से बने सस्ते उत्पादों के बाजार में आने से हाथ से बने सामान की मांग कम हुई है। कई युवा अब इस पुश्तैनी काम को छोड़कर दूसरे रोजगार की तलाश में शहर की ओर रुख कर रहे हैं।

हाथ का काम धीरे-धीरे कम हो रहा है, लेकिन जो लोग असली चीज़ पहचानते हैं, वे आज भी हमारे पास आते हैं।

कुछ स्थानीय संस्थाएं कारीगरों को सीधे ग्राहकों और ऑनलाइन बाजार से जोड़ने की कोशिश कर रही हैं, जिससे बिचौलियों की भूमिका कम हो और कारीगरों को उनके काम का उचित मूल्य मिल सके। कारीगरों का कहना है कि अगर सरकारी स्तर पर प्रशिक्षण और बाजार तक पहुंच में मदद मिले, तो यह परंपरा आने वाली पीढ़ियों तक बच सकती है।

राजस्थान डेस्क

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पाठकों की प्रतिक्रिया

अशोक सैनी

योजना अच्छी है, लेकिन इसे जमीन पर सही तरीके से लागू करना जरूरी है।

16 जून 2026, 2:00 अपराह्न

प्रिया राठौड़

क्षेत्र के लोगों को राहत मिलनी चाहिए, यह मांग जायज है।

7 जुलाई 2026, 11:46 अपराह्न

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